Author Topic: LATEST STATUS OF EDUCATION IN PUNJAB. REPORT BY DAINIK JAGRAN PB.  (Read 877 times)

Gaurav Rathore

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Must Read & Give Comments... पिछड़ रहा पंजाब .. प्राइमरी शिक्षा से शुरू होने चाहिएं सुधार ... शिक्षा प्रणाली में सुधार का मिशन : मलूका ... सिर्फ बातों की नहीं काम की जरू रत .. सिलेबस ऐसा हो जो बच्चों को समझ आए
सूबे में शिक्षा की चौखट आज तक पूरी नहीं खुल सकी है। कहीं पर सरकार तो कहीं पर शिक्षकों की लापरवाही के चलते पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ रहा है। साक्षरता दर 76.6 से 74 फीसदी हो गई। बेशुमार पैसा फर्नीचर पर खर्च करने के बावजूद टाट पर बैठे बच्चे किताबें पढ़ते दिखते हैं। कुलमिलाकर शिक्षा के दीपक की लौ काफी धीमी है


63 हजार बच्चों को स्कूल नसीब नहीं
शिक्षा के मामले में पंजाब का पिछड़ना जगजाहिर हो चुका है। साल 1991 से लेकर 2011 तक के आंकड़े बताते हैं कि कोई भी सरकार हो चाहे वह अकाली-भाजपा हो या कांग्रेस की शिक्षा के मामले में गंभीर होने की जरूरत है। 20 सालों में पंजाब की साक्षरता दर में सिर्फ और सिर्फ वो भी करीबन 12 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इतनी कम बढ़ोतरी तब है जब सूबे में 19 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल, सात विश्वविद्यालय और 200 से ज्यादा विभिन्न कालेज और हजारों की संख्या में निजी स्कूल और शिक्षण संस्थान हैं। उच्च शिक्षा में केवल 7.79 फीसदी हिस्सेदारी बुनियादी शिक्षा व्यवस्था सही नहीं होने के कारण पंजाब में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं में 7.79 फीसदी युवा ही भागीदारी निभा रहे हैं। अब अगर उच्च शिक्षा में इतनी कम भागीदारी होगी तो नई मल्टीनेशनल कंपनियों व बड़ी औद्योगिक इकाइयों में पंजाब के युवा किस प्रकार अपनी उपस्थिति दर्ज करवा पाएंगे। मिड डे मील की समस्या नहीं हुई हल केंद्र सरकार भले ही मिड-डे मील के लिए अरबों रुपये पंजाब को भेज रही है लेकिन मैचिंग ग्रांट राज्य सरकार के गले की हड़्डी बनी रही है। साल 2009-10 में प्रदेश सरकार ने मिड-डे मील के लिए अपने हिस्से का धन ही जारी नहीं किया। 2008-09 में राज्य का हिस्सा 23.86 करोड़ था, लेकिन 17.89 करोड़ रुपये ही जारी किया गया। साल 2007-08 में मिड-डे मील का बजट 16 करोड़ था जबकि प्रदेश सरकार महज 15 लाख ही रुपये ही खर्च कर पाई। खस्ता हालत में चल रहे स्कूल 800 स्कूल ऐसे हैं जहां पर जान दांव पर लगाकर विद्यार्थियों को खस्ता हाल इमारतों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इनमें से ज्यादातर स्कूल निजी व किराए की इमारतों में चल रहे हैं। इन इमारतों पर कानूनी अड़चनों के चलते विभाग इन पर पैसा भी नहीं खर्च कर रहा है जोकि बहुत ही विकट समस्या है। सर्व शिक्षा अभियान भी औंधे मुंह गिरा स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के नाम पर अरबों खर्च करने वाली पंजाब सरकार अपने कार्यकाल में एक बार भी अपने हिस्से का पूरा पैसा नहीं दे पाई। नौंवी पंचवर्षीय योजना के दौरान शुरू इस स्कीम में 85 फीसदी हिस्सा केंद्र को और 15 फीसदी राज्य सरकार को देना था। 10वीं पंचवर्षीय योजना के तहत फंड का अनुपात 2009 से 2010 तक 75-25, जबकि 2011-12 में में यह हिस्सेदारी 50-50 फीसदी के हिस्सेदारी की है। 2009-10 में तो पंजाब सरकार ने अपने हिस्से का एक भी पैसा नहीं डाला था। 2009-10 में पंजाब सरकार ने अभियान के तहत 92.79 करोड़ के स्थान पर केवल 59.50करोड़ ही जारी किए। वर्ष 2007-08 में कुल 184.79 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य था इसमें केंद्र का 120.18 करोड़ रुपये व राज्य सरकार का 120.18 करोड़ रुपये था। राज्य सरकार ने केवल 44.68 करोड़ रुपये जारी किए। कैसे हासिल होगा विज्ञान का ज्ञान पंजाब भर में स्कूलों का हाल यह है कि बीते 15 सालों से प्रयोगशालाओं में प्रयोग के लिए सामग्री व केमिकल ही सप्लाई नहीं किया गया है। विज्ञान की प्रयोगशालाएं बच्चों के इंतजार में रहती हैं, लेकिन गुलजार नहीं हो पा रही हैं। पिछड़े व दलितों की पाठशाला इस समय 70 फीसदी दलित व पिछड़े वर्गो के विद्यार्थी पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बाकी वर्गो के बच्चे इन सरकारी स्कूलों का हाल देख निजी स्कूलों का रुख कर गए। 80 लाख मिले लेकिन डूब गए 45 लाख राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) की लाखों की ग्रांट शिक्षा विभाग खर्च नहीं कर पाया है। आरएमएसए के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न प्रोजेक्ट वर्क करवाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से 80 लाख 50 हजार रुपये (20 जिलों के लिए) ग्रांट के तौर पर दिए गए थे। प्रदेश भर में केवल इस योजना के तहत 35 लाख 7 हजार 983 रुपये ही खर्च किए गए। बाकी की धनराशि केन्द्र को वापस करनी पड़ी यानि कि हमारे किसी काम ये 45 लाख नहीं आ सके। प्रदेश के स्कूलों में स्टाफ की कमी वर्तमान में 80 फीसदी दर्जा चार कर्मचारी, 50 फीसदी क्लर्क, 60 फीसदी हेडमास्टर, 60 फीसदी प्रिंसिपलों के बिना शिक्षा व्यवस्था साक्षरता दर बढ़ाने की कोशिश में लगी है। ड्राप-आउट का सिलसिला ड्राप आउट का सिलसिला इतना जारी है कि 63 हजार से ऊपर विद्यार्थी आज भी स्कूलों से बाहर घूम रहें हैं। 54 हजार भर्ती का दावा सरकार 54 हजार शिक्षकों की भर्ती का दावा तो करती है पर अभी भी प्रदेश में करीब 22 हजार शिक्षकों की पोस्टें खाली पड़ी हुई हैं। शिक्षा विभाग द्वारा तीन लाख पद मंजूर हैं। इस पर गंभीर होने की जरूरत पंजाब एजूकेशन डेवलेपमेंट बोर्ड को और अधिकार देने होंगे। 32 सदस्यीय कमेटी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर निगाह रखने का काम नहीं शुरू कर पाई है। इन कमेटियों के आगे चार अन्य कमेटियां बनाई गयी है, जो पंजाब के शिक्षा स्तर को ऊंचा उठाने के लिए नीति 2025 कर सरकार को रिपोर्ट सौंप चुकी है। सिलेबस रिवीजन कमेटी का भी गठन किया गया है। कहां गया पैसा सरकार ने शिक्षा के सुधार के लिए शराब की बोतल पर एक रुपये का सेस लगाया था। इससे आने वाला रेवेन्यू कहां चला गया?    कुसुम अग्निहोत्री, जालंधर।
« Last Edit: October 07, 2012, 04:57:13 PM by G.Rathore »

 

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