Author Topic: डीईओ ऑफिस, जहां कोई अफसर नहीं आना चाहता  (Read 1168 times)

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डीईओ ऑफिस, जहां कोई अफसर नहीं आना चाहता

 Posted On June - 29 - 2015


अम्बाला, 26 जून(हप्र)
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय अंग्रेजों के जमाने के बने नकारा भवन में चल रहा है। करीब 100 साल पुराने इस भवन की हालत इतनी खस्ता है कि यहां काम करने वाले कर्मियों की जान हमेशा जोखिम में रहती है।
 भवन की दीवारें गिरने को हैं। छत हल्की बरसात में टपकने लगती हैं। कमरों की दीवारों में इतनी सीलन है कि कर्मचारियों को सांस की बीमारी न हो जाए इसके लिए वहां गत्ते व प्लाइवुड लगाए हुए हैं। डीईओ के कमरे की हालत भी इतनी खराब है कि कोई डीईओ अम्बाला आना ही नहीं चाहता।
 लोक निर्माण विभाग कई साल पहले इस भवन को असुरक्षित घोषित कर चुका है। डीईओ दफ्तर भी इस मामले को लेकर अपने निदेशालय को बार-बार खत लिखता रहा, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हुआ। भवन का एक कमरा तो बरसात में गिर गया, जबकि कुछ कमरों की हालत किसी कबाड़ी की दुकान जैसी है। कर्मियों के लिए न तो बैठने के लिए फर्नीचर है और न ही पीने के पानी का इंतजाम। शौचालय की हालत बदतर है। एक बरसात में ही पूरे डीईओ दफ्तर के चारों ओर एक से दो फुट तक पानी भर जाता है।
 पिछले कई महीनों से यहां जिला शिक्षा अधिकारी न होने के कारण इसकी देख-रेख करने का जिम्मा राम भरोसे है। यहां उप जिला शिक्षा अधिकारी के तीन पद हैं, लेकिन दो खाली पड़े हैं और एक डिप्टी डीईओ सर्वशिक्षा अभियान के दफ्तर में बैठता है।
 जिला में खंड शिक्षा अधिकारी के 6 पद हैं, लेकिन नग्गल, शहजादपुर व बराड़ा के पद कई महीनों से खाली हैं। खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी के पद भी साहा, नारायणगढ़, शहजादपुर व बराड़ा में खाली पड़े हैं।
 सेक्शन ऑफिसर के 2 में से 1 पद खाली है। केवल यही नहीं डीईओ दफ्तर के लिए बाबूओं के 31 पद निर्धारित हैं, जबकि इनमें से 19 खाली पड़े हैं।
 डीईओ दफ्तर की बदहाली को देखकर कई लिपिक तो यहां से ताबदला करवाकर स्कूलों में चले गये हैं।  जो हैं, वे भी यहां रहने के मूड में नहीं हैं। यहां के बाबू का कहना है कि इस दफ्तर में रहकर बीमारियों को न्योता देना है, इसलिए वे भी अब यहां से जाने की सिफारिश की तलाश में हैं।

 

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