Author Topic: इस साल में ही शुरू हो जाएगी टाइगर सफारी  (Read 406 times)

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इस साल में ही शुरू हो जाएगी टाइगर सफारी
भास्कर संवाददाता| बठिंडा
सीएमके ड्रीम प्रोजेक्ट टाइगर सफारी का काम शुरू कर दिया गया है। 18 दिसंबर 2013 को डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने बठिंडा में तीन करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट तैयार करने की घोषणा की थी लेकिन इसके लिए फंड जारी नहीं हो पा रहा था। अब पिछले सप्ताह प्रकाश सिंह बादल ने बठिंडा का दौरा किया तो उन्होंने वित्त विभाग को राशि जारी करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद वन विभाग को एक करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। फंड मिलने के बाद काम में तेजी लाई जाएगी। उम्मीद है कि नवंबर तक प्रोजेक्ट को पूरा कर आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। गौरतलब है कि मालवा का पहले डियर सफारी बठिंडा में बनने के बाद सेंट्रेल जू अथॉर्टी ने बठिंडा में टाइगर सफारी बनाने की इजाजत तीन साल पहले दी थी। वन विभाग के डीएफओ डॉ. संजीव तिवारी ने बताया कि टाइगर सफारी का प्रोजेक्ट भेजा गया था जो मंजूर कर दिया गया। सफारी बनाने की मंजूरी सेंट्रल जू अथॉर्टी दिल्ली ने दे दी है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद टाइगर को छतबीड़ जू से मंगवाया जाएगा।
डिप्टी सीएम दे चुके मंजूरी
उपमुख्यमंत्री ने बीड़ तलाब को सैर सपाटा और सूचना के केंद्र के तौर पर स्थापित करने की मंजूरी दी है। अगले पड़ाव में जू कम डियर सफारी को टाइगर सफारी में तबदील किया गया है। डियर सफारी पार्क में हर किस्म के हिरन, जिराफ, जेबरा समेत अन्य किस्म के जानवर लाए गए हैं।

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तापमान कम होने पर ही मिनी जू में पाएंगे लैपर्ड

शहर में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते गर्मी की इन छुटि्टयों में बच्चे नहीं देख पाएंगे तेंदुए, अफसर तैयारियों में जुटे

भास्कर संवाददाता|बठिंडा
गर्मियोंकी छुट्टियों में बच्चों की बीड़ तालाब के मिनी जू में लैपर्ड यानी तेंदुए को नजदीक से देखने की हसरत पूरा हो सकेगी। भयंकर तापमान की बदौलत मेहमान तेंदुओं को बठिंडा लाना फिलहाल कुछ दिन आगे सरक गया है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने भले ही सेंट्रल जू अथॉरिटी की हिदायतों पर तेंदुओं के लिए मौसम के अनुकूल व्यापक बंदोबस्त कर लिए हैं, इसके बावजूद भी तापमान में थोड़ी गिरावट आने के बाद ही मेहमान लैपर्ड को लाने का इच्छुक है।
45डिग्री के पार चल रहा है तापमान : जूनकी शुरुआत से ही तापमान लगातार बढ़ रहा है और 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा पहुंचा है। प्रचंड गर्मी और लू के थपेड़े वन्य जीवों के लिए बेहद घातक हैं। वैसे भी जगह बदलने के साथ क्लाइमेक्स और एनवायर्नमेंट बदल जाता है जबकि प्रारंभिक चरण में गर्म माहौल में खुद को एडजस्ट करना वन्य जीवों के लिए असहनीय रहता है।
पिंजरोंमें लगाए बड़े कूलर ग्रीन पर्दे : टेंपरेचरमेंटेन करने के लिए बीड़ तालाब जू प्रबंधन की ओर से कूलर ग्रीन परदे लगाए गए हैं। तेंदुए को रखने के लिए पिंजरों के बाहर बड़े 3 कूलर लगाए गए हैं।
सहारनपुर से आएगी डाइट
मिनीजू में तेंदुओं की डाइट सहारनपुर से आएगी, प्रतिदिन ट्रेन के माध्यम से सहारनपुर से लगभग 12 किलो फ्रेश बीफै बठिंडा पहुंचेगा। प्रत्येक तेंदुए को डाइट के तौर पर 4 किलो फ्रेश बीफै दिन में एक बार शाम के समय दिया जाएगा। लगभग 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से तेंदुओं की डाइट पर 1200 रुपए प्रतिदिन का खर्च आएगा।
बरसात आने पर आएंगे
पहलीबरसात के साथ ही जुलाई की 5 तारीख तक स्पेशल जू व्हीकल के जरिए तेंदुए बठिंडा की बीड़ तालाब मिनी जू में लाए जाएंगे। हालांकि सेंट्रल जू अथॉरिटी दिल्ली की ओर से चंडीगढ़ की छतबीड़ जू से तीन तेंदुए लाने की मंजूरी मार्च महीने में ही मिल चुकी है। मिनी जू में रहे तीन तेंदुओं में 8 से 10 साल की मादा तेंदुए के अलावा 6 महीने का दो शावक आएंगे।
मिनी जू में तेंदुए के पिंजरों की चेकिंग करते गार्ड लखविंदर सिंह रेंज अफसर।
मौसम थोड़ा फेवरेबल होने पर लाए जाएंगे लैपर्ड
^एडवर्सकंडीशन में लैपर्ड के शिफ्टिंग का प्रोसेस नहीं है। थोड़ा बरसात से मौसम थोड़ा फेवरेबल होना चाहिए, आखिर एनीमल की जिंदगी का सवाल है, ऐसे तापमान में लाकर उन्हें खतरे में नहीं डाला जा सकता। हालांकि सेंट्रल जू अथॉरिटी की हिदायतों के अनुरूप सारी तैयारियां मुकम्मल हो चुकी हैं। - हरभजनसिंह, डिविजनल फॉरेस्ट अफसर, बठिंडा

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मिनी जू में दो मेल और एक फीमेल तेंदुए पहुंचे, सितंबर से देख सकेंगे

बीड़तालाब जंगल के 161 एकड़ में फैला है मिनी जू

महिंदर चौधरी जियोलॉजिकल पार्क से बीड़तालाब लाए गए तेंदुए, क्लाइमेट और माहौल में ढालने के लिए कर रहे निगरानी

भास्कर संवाददाता|बठिंडा
बच्चोंकी समर वेकेशन में भले ही बच्चों की हसरत पूरा हो सकी हो लेकिन अब सितंबर महीने में बीड़तालाब मिनी जू में तेंदुए देखे जा सकेंगे। मिनी जू-कम-डियर सफारी बीड़तालाब में 3 तेंदुए लाए गए हैं जिनमें इनमें दो मेल जबकि एक फीमेल तेंदुआ है जोकि महिंदर चौधरी जियोलॉजिकल पार्क से लाए गए हैं। इलाके के क्लाइमेट माहौल में ढालने के लिए इन तेंदुओं की निगरानी रखी जाएगी जबकि सितंबर महीने में इन्हें आम पब्लिक के देखने के लिए लिए एनक्लोजर में निर्धारित समय के अनुरूप छोड़ा जाएगा। मालवा के लोगों को दुर्लभ वन्य प्राणियों से रूबरू कराने के लिए वन विभाग ने सितंबर 2015 में सेंट्रल जू अथॉरिटी से मिनी जू में तेंदुए का पिंजरा यानी एनक्लोजर बनाने की मंजूरी मिली। लगभग 79 लाख रुपए की लागत से मिनी जू में तेंदुए के लिए एनक्लोजर तैयार किया गया जबकि फरवरी में भारत सरकार के सेंट्रल जू अथॉरिटी की गाइडलाइंस के अनुसार वन विभाग ने छतबीड़ चिड़िया घर से दो मेल एक फीमेल समेत तीन तेंदुए मिनी जू कम डियर सफारी से हासिल किए।
79 लाख की लागत से मिनी जू में तेंदुए के लिए तैयार किया एनक्लोजर
बीड़तालाब के मिनी जू में लाया गया तेंदुआ। -भास्कर
बठिंडा से लगभग 6 किलोमीटर दूर मुल्तानिया सड़क पर वन मंडल के बीड़तालाब जंगल में 161 एकड़ में मिनी जू कम डियर सफारी स्थित है। साल 1987 में रेडक्रॉस की ओर से बतौर डियर सफारी बीड़तालाब शुरू किया गया था, जबकि 1982 में यह डियर सफारी पार्क वन्य एवं जंगली जीव सुरक्षा विभाग पंजाब की ओर से अपने अधीन ले लिया गया था। वहीं 2014 में सेंट्रल जू अथारिटी भारत सरकार की ओर से इस डियर सफाई पार्क को मिनी जू कम डियर सफारी बनाने का मास्टर प्लान मंजूर किया गया। इसके बाद यहां लगभग 115 एकड़ रकबे में डियर सफारी का निर्माण किया गया जिसमें आज हिरण जाति की चार किस्मों वाला हिरण, हॉंग डियर, चीतल तथा सांबर के लगभग 135 हिरण मौजूद हैं। वहीं लगभग 30 एकड़ रकबे में मिनी जू बनाया गया है जिसमें लगभग 9 बंदर, 4 परकोपाइन सेह तथा पक्षियों की 11 किस्मों के लगभग 205 पक्षी मौजूद हैं। इस मिनी जू कम डियर सफारी में इससे पहले कोई भी मांसाहारी जानवर मौजूद नहीं था।

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