Author Topic: Funny Poems  (Read 12841 times)

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 59376
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #40 on: June 16, 2013, 02:50:57 PM »
हाथी की मस्ती
 
हाथी आया हाथी आया
 देखो भैया हाथी आया।
 कितना मोटा कितना भारी
 चलने में भी है लाचारी।
 चलता है अपनी मस्ती में
 आया है अपनी बस्ती में।
 शक्ल-सूरत में काला भूंड
 एक लंबी है इसकी सूंड।
 बड़े-बड़े दो कान हिलाता
 दांत दिखाकर मुझे डराता।
 -ईश्वर सिंह खिच्ची

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 59376
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #41 on: June 16, 2013, 02:51:35 PM »
सैर करो
 
सैर करो रे सैर करो,
 सुबह-सवेरे सैर करो।
 उठोगे गर जो चार से पांच,
 सेहत पर नहीं आएगी आंच।
 उठकर दादा जी के साथ,
 लेकर उनका हाथ में हाथ।
 खुली जगह पर सैर को जाओ,
 मध्यम चाल से कदम बढ़ाओ।
 लंबी-लंबी सांस खींचना,
 कभी छोडऩा कभी रोकना।
 इससे ताजा हवा मिलेगी,
 तन और मन की कली खिलेगी।
 जब तुम जाओगे ग्राउंड-स्कूल,
 रहोगे दिनभर एक्टिव-कूल
                                     -सतीश मराठा

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 59376
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #42 on: June 16, 2013, 02:53:04 PM »

बाल कविताएं

 Posted On June - 1 - 2013


मेरे पापा
 
कितने अच्छे मेरे पापा
 दिल के सच्चे मेरे पापा।
 बड़ों के संग बड़े बन जायें
 बच्चों के संग बच्चे पापा॥
 पापा हमारे पढ़े-लिखे हैं
 अच्छी बातें हमें सिखाते हैं।
 घर का काम संभाले मम्मी
 पापा हमको रोज़ पढ़ाते हैं॥
 हमारे लिए पापा दिनभर
 दफ्तर में करते काम।
 वो कहते हैं हमसे हमेशा
 खूब पढ़ो और कमाओ नाम॥
 मानूंगा मैं उनकी बात
 मेहनत करूंगा दिन और रात।
 एक विनती है भगवान हमारी
 सिर पर सदा रहे उनका हाथ॥

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 59376
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #43 on: June 16, 2013, 03:00:28 PM »
मौसम बदल गया
 
रखा बक्स में नानी मां ने,
 नाना जी का शाल।
 जब से फटने लगे
 चटाचट,
 तालाबों के गाल।
 उठीं नींद से, बंद
 खिड़कियां,
 देखें आंखें फाड़।
 गांव गली में लहराते हैं,
 ज्वालाओं के झाड़।
 आवारा सी घूम रही लू,
 आंधी लेकर साथ,
 गर्म सलाखों से लगते हैं,
 अब किरणों के हाथ।
 लस्सी, शरबत, आम मतीरे
 लेकर आती शाम,
 पंखे, कूलर चलते फिर भी,
 गरमी पूछे नाम।
 अब्दुल मलिक खान
 इतवार की सुबह
 बंदर जी इतवार की सुबह,
 रहे देर तक जब सोते,
 बोली बंदरिया-उठ जाओ,
 लगाते रहो न सपनों में गोते।
 बंदर बोले-आज है छुट्टी,
 ज़रा चश्मा-अखबार तो लाओ,
 जब तक देखूं मैं सुर्खियां,
 बढिय़ा-सी इक चाय बनाओ।

 

GoogleTagged



Funny faraz

Started by nav_punjabi

Replies: 22
Views: 4785
Last post May 01, 2012, 05:35:46 PM
by nav_punjabi
Poems of Jack Elixir

Started by <--Jack-->

Replies: 136
Views: 25584
Last post February 26, 2018, 10:00:12 PM
by etzone
Bewafa Poems

Started by Soft Kaur

Replies: 5
Views: 4417
Last post February 26, 2018, 09:58:24 PM
by etzone
Love Poems

Started by Navcharan Singh

Replies: 118
Views: 27409
Last post April 29, 2013, 07:28:20 PM
by Rocky