Author Topic: Funny Poems  (Read 11160 times)

devilal

  • Guest
Re: Funny Poems
« Reply #20 on: December 16, 2012, 09:11:47 AM »
भूतपूर्व हंसी  (From Dainik Tribune)
 
ज्यों-ज्यों दफ्तर में
 उनका ओहदा बढ़ता गया,
 गंभीरता का चश्मा
 उनके चेहरे पर चढ़ता गया।
 नौकरी में नए-नए आए थे
 तो लगाते थे
 बात-बात पर ठहाके,
 लेकिन अब लगता है जैसे
 बैठे हों किसी मातम पर।
 हर ऊंची कुर्सी ने
 उनकी हंसी छीन ली है,
 लगता है जैसे उ न्होंने
 दु:ख की कीलें बीन ली हैं।
                                       -हरीश कुमार अमित
beutifull  poems

vineysharma

  • Guest
Re: Funny Poems
« Reply #21 on: December 16, 2012, 05:32:42 PM »
क्या याद रहा और क्या भूल गये
 
कुत्ते को घुमाना याद रहा और गाय की रोटी भूल गये।
 पार्लर का रास्ता याद रहा और लम्बी चोटी भूल गये।।
 
फ्रीज-कूलर याद रहा, पानी का मटका भूल गये।
 रिमोट तो हमको याद रहा, बिजली का खटका भूल गये॥
 
बिसलेरी पानी याद रहा, पर प्याऊ का पानी भूल गये।
 टीवी सीरियल याद रहे, पर घर की कहानी भूल गये।
 
हैलो हाय तो याद रही, पर नम्र प्रणाम भूल गये।
 हिल स्टेशन याद रहे, पर चारों धाम को भूल गये॥
 
अंकल आंटी याद रहे, पर चाचा मामा भूल गये।
 वरमूडा तो याद रहा, पर फुल पाजामा भूल गये॥
 
दोस्त यार सब याद रहे, पर सगे भाई को भूल गये।
 साली का जन्मदिन याद रहा, पर मां की दवाई भूल गये॥
                                                                               " अशोक गंगवाल
Ghour Kalyug...........

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 35512
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #22 on: December 18, 2012, 09:10:57 AM »
ਗਾਲੜ੍ਹ 

ਗਾਲੜ੍ਹ ਸਾਡੀ ਛੱਤ 'ਤੇ ਆਉਂਦਾ।

ਮੈਂ ਕੁਝ ਉਸ ਨੂੰ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ।

ਰੋਟੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੁੰਦਾ।

ਉਸ ਨਾਲ ਸਾਂਝ ਵਧਾਉਣੀ ਚਾਹੁੰਦਾ।

ਪਰ ਉਹ ਵੇਖ ਕੇ ਮੈਨੂੰ ਡਰਦਾ।

ਪੂਛਲ ਚੁੱਕ ਕੇ ਜਾਵੇ ਭੱਜਦਾ।

ਪਰ ਉਸ ਨੂੰ ਕਿਹੜਾ ਸਮਝਾਵੇ?

'ਆਮਰ' ਉਸ ਨੂੰ ਕਿੰਨਾ ਚਾਹਵੇ?

ਮੂਲ : ਅਸ਼ਰਫ਼ ਸੁਹੇਲ,

ਲਾਹੌਰ (ਪਾਕਿਸਤਾਨ)।
ਲਿਪੀਅੰਤਰ : ਦਰਸ਼ਨ ਸਿੰਘ ਆਸ਼ਟ,
ਮੋਬਾ: 98144-23703
« Last Edit: December 18, 2012, 09:12:13 AM by SHANDAL »

devilal

  • Guest
Re: Funny Poems
« Reply #23 on: December 26, 2012, 05:25:45 PM »
क्या याद रहा और क्या भूल गये
 
कुत्ते को घुमाना याद रहा और गाय की रोटी भूल गये।
 पार्लर का रास्ता याद रहा और लम्बी चोटी भूल गये।।
 
फ्रीज-कूलर याद रहा, पानी का मटका भूल गये।
 रिमोट तो हमको याद रहा, बिजली का खटका भूल गये॥
 
बिसलेरी पानी याद रहा, पर प्याऊ का पानी भूल गये।
 टीवी सीरियल याद रहे, पर घर की कहानी भूल गये।
 
हैलो हाय तो याद रही, पर नम्र प्रणाम भूल गये।
 हिल स्टेशन याद रहे, पर चारों धाम को भूल गये॥
 
अंकल आंटी याद रहे, पर चाचा मामा भूल गये।
 वरमूडा तो याद रहा, पर फुल पाजामा भूल गये॥
 
दोस्त यार सब याद रहे, पर सगे भाई को भूल गये।
 साली का जन्मदिन याद रहा, पर मां की दवाई भूल गये॥
                                                                               - अशोक गंगवाल
wah kaya baat hai

maninder sachdeva

  • Guest
Re: Funny Poems
« Reply #24 on: December 26, 2012, 05:50:49 PM »
very funny

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 35512
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #25 on: December 30, 2012, 02:59:46 PM »

लोकतंत्र के दोहे

 Posted On December - 21 - 2012


राजनीति का खेल भी, मितवा बड़ा अजीब।
 मिलती टिकट कुबेर को, जोहे बाट गरीब॥
 राजनीति में नित नये, हो रहे चमत्कार।
 दागी-बागी बन गये, देख उम्मीदवार॥
 बागी-दागी बन गये, राजनीति के कंस।
 फिर भी इनका बढ़ रहा, रात चौगुनी वंश॥
 राजनीति के सूरमा, छोड़ गए सब रीत।
 करते खुलकर देश से, खुद ही देख अनीत॥
 तरह-तरह के मिल रहे, वोटर को उपहार।
 यही घोषणा कर रहे, सभी दल लगातार॥
 मौसम आज चुनाव का, नेता सारे व्यस्त।
 सुन-सुन झूठे वायदे, मतदाता है पस्त।
 वोटर सब कुछ जानता, बनता है अनजान।
 उदासीन होकर करे, खुद ही कम मतदान॥
 प्रश्नचिन्ह लगने लगा, चुनाव बना मजाक।
 कटती, कम मतदान से, लोकतंत्र की नाक॥
 होता कम मतदान है, चुनाव में हर बार।
 पाकर सीमित वोट फिर बने जीत हकदार॥
 अब गिरते मतदान पर, मिलकर करो विचार।
 मतदान जरूरी बने, होगा तभी सुधार॥
 
-रोहित यादव


SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 35512
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #26 on: December 30, 2012, 03:00:56 PM »

लोकतंत्र के दोहे

 Posted On December - 28 - 2012


सांप-नेवलों में बढ़ा, जब से मेल-मिलाप।
 दोनों दल खुशहाल हैं, करता देश विलाप॥
 बुलबुल की अस्मत लुटे, बाज करेंगे जांच।
 यही लिखा कानून में, जरा गौर से बांच॥
 खाद्य मंत्री बन गए, जब से रंगे सियार।
 भूखी जनता कर रही, तब से हाहाकार॥
 जंगल में लागू हुआ, जब से नया विधान।
 लोमड़ बन गये मंत्री, गीदड़ जी सुलतान॥
 लोकतंत्र लागू हुआ, गया सिंह का राज।
 बूथ लूटकर भेडिय़ा, बन बैठा वनराज॥
 जंगल में भी हो गया, लोकतंत्र साकार।
 सांप-नेवले कर रहे, मिलकर आज शिकार॥
 जनहित की परवाह नहीं, नहीं लोक की लाज।
 कौवों की सरकार का, करें समर्थन बाज॥
 कदर कहां गौवंश की, भोग रहा संत्रास।
 गधे जलेबी खा रहे, नहीं गाय को घास॥
 हंस चाकरी कर रहे, काग बने सरदार।
 करने लगे गंवार भी, शिक्षा का व्यापार॥
 जब से उसने सुन लिया, लोकतंत्र का सार।
 गीदड़ भी करने लगा, सिंहों से तकरार॥
 -रघुविन्द्र यादव

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 35512
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #27 on: December 30, 2012, 03:03:28 PM »

बाल कविताऐं

 Posted On December - 29 - 2012


नए वर्ष में
 नए वर्ष में मेरी मां,
 मत करना तुम टालमटोल
 भेजोगी न मुझको शाला?
 कुछ तो मुख से अपने बोल।
 कमला पढ़ गयी बिमला पढ़ गई,
 टीचर बन गयी माया,
 पशु के जैसे अनपढ़ होते,
 बोल रही थी छाया।
 अक्षर ज्ञान बिना तो लगता
 जीवन में अंधियारा,
 शिक्षा की ज्योति से ही
 फैलेगा उजियारा।
 सुन लो मां अब मेरी बात
 ला दो पोथी, कलम, दवात,
 जाऊंगी मैं शाला
 मेहनत करूंगी दिन और रात।
 फिर ऊंचे पद पर जाऊंगी
 खूब नाम कमाऊंगी,
 मां तेरी शान बढ़ाऊंगी
 काम देश के आऊंगी।
 -कृष्णा अवस्थी

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 35512
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #28 on: December 30, 2012, 03:04:15 PM »
नये गुल खिलाने, नया वर्ष आया,
 अभिनंदन है सबका, नया वर्ष आया।
 लगे थे जो कुम्हलाने गुल प्यार के,
 उन्हें फिर खिलाने नया वर्ष आया।
 चलो अब दिलों से ये न$फरत मिटाएं,
 मिले सब गले के नया वर्ष आया।
 जहां से हटा दें ये कचरा दुखों का,
 हों हर घर में खुशियां नया वर्ष आया।
 कोई मांग उजड़े न घर कोई बिखरे,
 न बहे खून सरहद पे ये पैगाम लाया।
 नये गुल खिलाने नया वर्ष आया,
 अभिनन्दन है सबका नया वर्ष आया॥
 -विजय रानी बंसल

SHANDAL

  • News Editor
  • *****
  • Offline
  • Posts: 35512
  • Gender: Male
  • English
    • View Profile
Re: Funny Poems
« Reply #29 on: December 30, 2012, 03:05:01 PM »
जंगल में नववर्ष
 नव वर्ष के मुबारक मौके पर,
 शेर ने जंगल में डीजे मंगवाया।
 चारों तरफ लगवाकर माइक
 बढिय़ा गाना बजवाया॥
 बंदर मामा ने आकर रंग में
 खूब दिखाया डांस।
 बोले जितनी मस्ती करनी है कर लो आज
 फिर मिले न मिले ये चांस॥
 लोमड़ भाई ने लगा लिए थे
 दारू के दो पैग।
 बोले! शेरनी के संग ही डांस कराओ
 वरना नहीं है किसी की खैर॥
 सुनकर लोमड़ भाई की बातें
 शेर को चढ़ गया गुस्सा।
 बोला! यहां से चला जा तू
 नहीं तो खा जाऊंगा कच्चा॥
 आकर ऊंट चौधरी ने
 मेल-मिलाप कराया।
 लोमड़ भाई ने मांगी माफी
 शेर ने भी उसे गले लगाया॥
 फिर सब जंगल वालों ने
 हैप्पी न्यू ईयर कहा सबको।
 हम सब फिर मिलें यहां
 कहकर, शेर ने विदा किया सबको॥
 -योगी सारस्वत

 

GoogleTagged



Funny faraz

Started by nav_punjabi

Replies: 22
Views: 3789
Last post May 01, 2012, 05:35:46 PM
by nav_punjabi
Poems of Jack Elixir

Started by <--Jack-->

Replies: 135
Views: 23531
Last post April 21, 2015, 08:36:33 PM
by PATIALA CITY
Bewafa Poems

Started by Soft Kaur

Replies: 4
Views: 4029
Last post May 30, 2011, 10:55:09 AM
by Soft Kaur
Love Poems

Started by Navcharan Singh

Replies: 118
Views: 25952
Last post April 29, 2013, 07:28:20 PM
by Rocky