Author Topic: Indian Law Says  (Read 51639 times)

R S Sidhu

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Re: Indian Law Says
« Reply #10 on: June 11, 2012, 03:36:40 PM »

R S Sidhu

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Re: Indian Law Says
« Reply #11 on: June 11, 2012, 03:37:34 PM »

RAJ

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Re: Indian Law Says
« Reply #12 on: June 11, 2012, 03:56:34 PM »
धर्म के नाम पर आरक्षण का सुप्रीम कोर्ट ने किया विरोध
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Story Update : Monday, June 11, 2012    2:06 PM


सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अल्पसंख्यक आरक्षण के मामले में केंद्र सरकार को करारा झटका दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा अल्पसंख्यक आरक्षण पर दिए गए फैसले पर स्टे लगाने से फिलहाल मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश में धर्म के आधार पर मु‌सलमानों को दिए गए 4.5 फीसदी आरक्षण के लिए केंद्र सरकार पर्याप्‍त सबूत पेश करे। केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने अगले बुधवार तक इस मामले से जुड़े सभी कागजात पेश करने को कहा है। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को ही करेगी।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के प्रयास से आंध्रप्रदेश में मुस्लिमों को धर्म के नाम पर 4.5 फीसदी आरक्षण दिया गया था। आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दिया था। सरकार ने हाईकोर्ट क्‍े फैसले पर स्टे लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

इससे पहले आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद साफ हो गया था कि किसी भी सरकार के लिए धार्मिक आधार पर आरक्षण देना नामुमकिन है। इसके बाद कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। खुर्शीद के इस फैसले का मुसलिम नेताओं ने भी विरोध किया था। मुस्लिम नेताओं का कहना है कि राजनीतिक दलों को इस तरह का खेल अब बंद कर देना चाहिए।

आंध्र प्रदेश में मुसलिम वोट बैंक खिसकता देख वर्ष 2004 में पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी ने आरक्षण की नींव रखते हुए 4.5 प्रतिशत आरक्षण की अधिसूचना जारी की थी। सूत्रों ने बताया कि आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को बेनकाब करने के लिए मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुहिम छेड़ने की रणनीति बनाई है।

विगत बोर्ड की विशेष बैठक में इस मुद्दे पर गहन चर्चा की गई है। जिस पर अलग-अलग चरणों में आंदोलन की रूप रेखा तैयार की जा रही है। बोर्ड कार्यकारिणी के सदस्य कमाल फारूखी ने कहा कि आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले मुसलमानों को आरक्षण दिए जाने की घोषणा की थी। लेकिन कुछ समय बाद ही हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। इससे साफ जाहिर है कि आरक्षण के नाम पर मुसलमानों को छला जा रहा है।

RAJ

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Re: Indian Law Says
« Reply #13 on: June 11, 2012, 04:05:36 PM »


अल्पसंख्यक आरक्षण पर SC ने सरकार को फटकारा
Monday, June 11, 2012, 14:09
टैग्स:: अल्पसंख्यक आरक्षण, 4.5 फीसदी आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट, फटकार
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अल्पसंख्यक आरक्षण पर SC ने सरकार को फटकारानई दिल्ली: अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक आरक्षण पर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि किस आधार पर अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी आरक्षण का फैसला किया गया है। प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। इस मामले पर बुधवार को दोबारा सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि बुधवार को वह सुनवाई से जुड़े कागजात के साथ मौजूद हो।

केंद्र सरकार ने ओबीसी कोटे के भीतर अल्पसंख्यकों को मिले 4.5 फीसदी आरक्षण को खारिज करने के आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।


गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यकों को ओबीसी कोटे के भीतर आईआईटी जैसे केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों
India.com
में 4.5 फीसदी आरक्षण दिया था। सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी आरक्षण देने का फैसला विस्तृत सर्वे के बाद लिया गया था, बावजूद इसके आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने गलत नजरिया अपनाया। हाई कोर्ट ने 28 मई को कहा था कि केंद्र ने अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी सब कोटा देने का फैसला बेहद हल्के ढंग से लिया।


sheemar

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Re: Indian Law Says
« Reply #14 on: October 11, 2012, 08:34:49 AM »

sheemar

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Re: Indian Law Says
« Reply #15 on: November 10, 2012, 09:42:13 AM »
'Reservation within reservation' illegal, says court

newsline
Friday, November, 09 2012

NEW DELHI: The Delhi High Court Friday called "illegal" the Kendriya Vidyalaya Sangathan's 2011-12 admission guidelines giving reservation to the Scheduled Castes and Tribes within the 25 percent seats reserved for economically-weaker sections.

Observing that admission guidelines were violative of the Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009, a division bench of Chief Justice D. Murugesan and Justice Rajiv Sahai Endlaw directed the Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) to reframe its guidelines for academic year 2013-14.

The court order came on a petition challenging the legality of the KVS's 2011-12 admission guidelines for Class 1 for the disadvantaged group and Economically Weaker Sections (EWS) that introduced 22.5 percent seats for the Scheduled Castes (SCs) and the Scheduled Tribes (STs) out of the 25 percent seats reserved for children belonging to disadvantaged groups and EWS.

"We are inclined to accept the case and declare that Clause 5(3) of the admission guidelines for admission to the school in Class I in the academic year 2011-12 introducing reservation to the extent of 22.5 percent of total seats for SC/ST out of 25 percent seats reserved for children belonging to disadvantaged group and economically weaker section is illegal and contrary to the provisions of the said act," said the bench.

"The petitioner has prayed for appropriate direction directing the school to reframe its admission guidelines. For the reasons, we direct the school to reframe its guidelines for admissions in the ensuing academic year 2013-14," it said.

The petitioner, advocate Ashok Aggarwal, had alleged that the KVS's 2011-2012 admission guidelines for admission to Class 1 for the disadvantaged groups and EWS violated the Right to Education Act.

The court opined that if these guidelines were to be implemented, the children belonging to weaker sections and disadvantaged groups would be "deprived of their legitimate share in the admission" and the classification would amount to "discrimination" among disadvantaged children.

"In the event the classification made by the school through its guidelines is implemented, the resultant position would be only to frustrate the provision of the act whereby children belonging to weaker section and disadvantaged group would be deprived of their legitimate share in admission," the court said.

The petition had said that this was not permissible under the Right to Education Act since it translated into "reservation within reservation" and was invalid.


sheemar

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Re: Indian Law Says
« Reply #16 on: November 21, 2012, 02:20:26 PM »
बेरोजगार पति भी दें गुजारा भत्ता ः कोर्ट
मदुरई। तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई बेंच ने अपने आदेश में कहा कि बेरोजगार होने पर भी पति को पत्नी को गुजारा भत्ता देना चाहिए।
जस्टिस जी राजासुरैया ने कहा कि पत्नी को मासिक गुजारा भत्ता देने की अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए पति खुद के गरीब होने का दावा नहीं कर सकता है। एक पति को किसी भी तरीके से पत्नी की देखभाल करनी चाहिए चाहे वह बेरोजगार ही क्यों न हो। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 3 मार्च को दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली एक व्यक्ति की पुनर्समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया। एजेंसी
दंपति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी जहां पर पति को 2 हजार रुपये अंतरिम गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।
इसके अलावा जस्टिस राजासुरैया ने पत्नी की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने 7000 रुपये अंतरिम गुजारा भत्ते की मांग की थी। पति ने गुहार लगाई थी कि उसके पास कमाई का कोई स्रोत नहीं है, ऐसे में वह गुजारा भत्ता चुकाने में असमर्थ है। जज ने अपने आदेश में कहा कि एक चुस्त और स्वस्थ व्यक्ति से काम करने और खुद तथा स्वयं पर निर्भर लोगों के भरण पोषण की उम्मीद की जाती है। पति को अपनी पत्नी की देखभाल करने चाहिए। एजेंसी

sheemar

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Re: Indian Law Says
« Reply #17 on: November 21, 2012, 02:21:28 PM »

sheemar

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Re: Indian Law Says
« Reply #18 on: November 21, 2012, 02:22:03 PM »

sher-ae-punjab

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Re: Indian Law Says
« Reply #19 on: March 07, 2013, 08:35:12 PM »
govt may give notional promotion for the post of  principal to cdac headmaster in the light of judgement of high court

 

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