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Messages - Gaurav Rathore

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Teachers News / Re: Teachers News Daily Updated
« on: March 31, 2018, 06:25:39 PM »
** हरियाणा सरकार मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को एक्सग्रेशिया नीति के तहत नौकरी प्रदान करने पर विचार कर

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Teachers News / Re: Teachers News Daily Updated
« on: March 31, 2018, 06:23:23 PM »

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ਮਾਪੇ-ਅਧਿਆਪਕ ਮਿਲਣੀ ਤੇ ਸਲਾਨਾ ਇਨਾਮ ਵੰਡ ਸਮਾਰੋਹ ਦਾ ਆਯੋਜਨ

ਫਗਵਾੜਾ 31 ਮਾਰਚ (ਰਾਠੌਰ) ਬਲਾਕ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਿੱਖਿਆ ਦਫਤਰ ਫਗਵਾੜਾ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ਤਹਿਤ ਸਰਕਾਰੀ ਐਲੀਮੈਂਟਰੀ ਸਕੂਲ ਜਗਤਪੁਰ ਜੱਟਾਂ ਵਿੱਚ ਐਸ.ਐਮ.ਸੀ. ਚੇਅਰਮੈਨ ਸੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਸਕੂਲ ਇੰਚਾਰਜ ਗੋਰਵ ਸਿੰਘ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਹੇਠਾਂ ਮਾਪੇ-ਅਧਿਆਪਕ ਮਿਲਣੀ ਤੇ ਸਲਾਨਾ ਇਨਾਮ ਵੰਡ ਸਮਾਰੋਹ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਤੇ ਸਕੂਲ ਇੰਚਾਰਜ ਗੋਰਵ ਸਿੰਘ ਵੱਲੋ ਵਿੱਦਿਅਕ ਵਰ੍ਹੇ ਦੌਰਾਨ ਸਕੂਲ ਦੀ ਵਿੱਦਿਅਕ ਅਤੇ ਸਹਿ-ਵਿੱਦਿਅਕ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਸਬੰਧੀ ਰਿਪੋਰਟ ਪੇਸ਼ ਕੀਤੀ। ਵਿੱਦਿਅਕ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੇ, ਦੂਸਰੇ ਤੇ ਤੀਸਰੇ ਸਥਾਨ ਤੇ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਮੈਡਲਾਂ ਨਾਲ ਕ੍ਰਮਵਾਰ ਪਹਿਲੇ, ਦੂਸਰੇ ਤੇ ਤੀਸਰੇ ਇਨਾਮਾਂ ਨਾਲ ਹੌਸਲਾ ਅਵਜਾਈ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਵੱਲੋ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਪੜ੍ਹੋ ਪੰਜਾਬ ਪੜ੍ਹਾਓ ਪੰਜਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਾਰਜਗੁਜਾਰੀ ਮਾਪਿਆਂ ਨਾਲ ਸਾਂਝੀ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਤੇ ਮੈਡਮ ਜੋਤੀ, ਐਸ.ਐਮ.ਸੀ ਮੈਬਰ ਬਲਬੀਰ ਚੰਦ, ਗੁਰਮੀਤ ਸਿੰਘ, ਇੰਦਰਜੀਤ ਸਿੰਘ, ਅਮਰਜੀਤ ਕੌਰ, ਹੇਮਾ, ਜੋਗੀ, ਜਸਪਾਲ ਸਿੰਘ, ਲਕਸ਼ਮੀ, ਪ੍ਰਮੋਦ ਕੁਮਾਰ, ਅਸ਼ੋਕ ਕੁਮਾਰ ਆਦਿ ਹਾਜਰ ਸਨ।

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Teachers News / Re: Teachers News Daily Updated
« on: March 23, 2018, 08:54:07 PM »

*ਅਗਲੇ ਸਾਲ ਤੋਂ ਆਪਣੇ ਸਕੂਲਾਂ ਚ ਪ੍ਰੀਖਿਆ ਦੇਣਗੇ ਪੰਜਵੀਂ ਦੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀ*
 March 23, 2018

2 ਅਪ੍ਰੈਲ ਨੂੰ ਸਰਕਾਰੀ ਸਕੂਲ ਦੇ ਹਰੇਕ ਬੱਚੇ ਕੋਲ ਹੋਣਗੀਆਂ ਕਿਤਾਬਾਂ
*15 ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਈਟੀਟੀ ਤੋਂ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਮਾਸਟਰ ਦੀਆਂ ਹੋਣਗੀਆਂ ਤਰੱਕੀਆਂ*
ਪ੍ਰੋਗਰੈਸਿਵ ਟੀਚਰਜ਼ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਵਫਦ ਨੇ ਕੀਤੀ ਸਿੱਖਿਆ ਸਕੱਤਰ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ
ਸਿੱਖਿਅਾ ਫੋਕਸ, ਮੋਹਾਲੀ। ਪ੍ਰੋਗਰੈਸਿਵ ਟੀਚਰਜ਼ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵਫਦ ਵੱਲੋਂ ਅੱਜ ਸਿੱਖਿਆ ਸਕੱਤਰ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਕੁਮਾਰ ਨਾਲ ਆਪਣੀਆਂ ਜਾਇਜ਼ ਤੇ ਹੱਕੀ ਮੰਗਾਂ ਦੇ ਸਬੰਧ ਵਿੱਚ ਮੁਲਾਕਾਤ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਇਹ ਗੱਲਬਾਤ ਬਹੁਤ ਹੀ ਸੁਖਾਵੇਂ ਮਾਹੌਲ ਚ ਗੰਭੀਰ ਮੁੱਦਿਆਂ ਤੇ ਹੋਈ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਸਿੱਖਿਆ ਸਕੱਤਰ ਵੱਲੋਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ਪ੍ਰਵਾਨ ਕਰ ਲਈਆਂ ਗਈਆਂ।
ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ ਪ੍ਰੋਗਰੈਸਿਵ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਵਫਦ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ਬਲਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਵੱਲੋਂ ਰੱਖੀਆਂ ਗਈਆਂ ਮੰਗਾਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਚ ਅਗਲੇ ਸਾਲ ਤੋਂ ਪੰਜਵੀਂ ਦੀ ਪ੍ਰੀਖਿਆ ਸਕੂਲਾਂ ਵਿੱਚ ਲੈਣ, ਸਕੂਲ ਮੁਖੀਆਂ ਨੂੰ ਫੰਡਾਂ ਦੇ ਖਰਚ ਸਬੰਧੀ ਅਧਿਕਾਰਿਤ ਕਰਨਾ, 2010 ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਐਡ ਕਰ ਚੁੱਕੇ ਸਿੱਖਿਆ ਪ੍ਰੋਵਾਇਡਰਾਂ ਨੂੰ ਟੀਈਟੀ ਤੋਂ ਛੋਟ ਦੇਣਾ, ਈਟੀਟੀ ਤੋਂ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਮਾਸਟਰ ਦੀਆਂ ਤਰੱਕੀਆਂ 15 ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ, ਅਪਰ-ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਜਮਾਤਾਂ ਦੇ ਸਿਲੇਬਸ ਦਾ ਰਿਵਿਊ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਸਿਲੇਬਸ ਤੇ ਵਿਸ਼ੇ ਘਟਾਉਣਾ, ਖੇਡਾਂ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਖੇਡ ਨੀਤੀ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਕਰਨਾ, ਸੈਂਟਰਲਾਈਜ਼ਡ ਰਸੋਈਆਂ ਦੀ ਥਾਂ ਸਕੂਲ ਅੰਦਰ ਹੀ ਮਿਡ ਡੇ ਮੀਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਹਿੰਦੀ ਤੇ ਸਮਾਜਿਕ ਸਿੱਖਿਆ ਦੇ ਵਿਸ਼ੇ ਨੂੰ ਲਾਜ਼ਮੀ ਵਿਸ਼ਾ ਰੱਖਣ ਦੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ਮੌਕੇ ਤੇ ਹੀ ਪ੍ਰਵਾਨ ਕਰ ਲਈਆਂ ਗਈਆਂ।
ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਜਥੇਬੰਦੀ ਦੀਆਂ ਹੋਰ ਮੰਗਾਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਚ ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦੀ ਬਦਲੀ ਨੀਤੀ ਦੀਆਂ ਤਰੁੱਟੀਆਂ ਦੂਰ ਕਰਨ, ਬ੍ਰਿਜ ਕੋਰਸ ਸਬੰਧੀ ਆ ਰਹੀ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਨ ਲਈ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਪੱਤਰ ਲਿਖਣ, 15 ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਕਿਤਾਬਾਂ ਸਕੂਲ ਚ ਬੱਚਿਆਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਦਾ, ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਸੁਣਨ ਤੇ ਜਾਨਣ ਲਈ ਮੋਬਾਇਲ ਐਪ ਬਣਾਉਣ, ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਸੂਚਨਾ ਦੇ ਆਦਾਨ-ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਲਈ ਐਪ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ, ਵਰਦੀਆਂ ਦੀ ਰਾਸ਼ੀ ਚ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਲਈ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਪੱਤਰ ਲਿਖਣ, ਮਾਸਟਰ ਕਾਡਰ ਦੀ ਚੱਲ ਰਹੀ ਭਰਤੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਨੇਪਰੇ ਚੜ੍ਹਾਉਣ ਅਤੇ ਤਨਖਾਹਾਂ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਜਾਰੀ ਕਰਨ ਦਾ ਸਿੱਖਿਆ ਸਕੱਤਰ ਵੱਲੋਂ ਪ੍ਰੋਗਰੈਸਿਵ ਟੀਚਰਜ਼ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਨੂੰ ਭਰੋਸਾ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ।
ਇਸ ਮੌਕੇ ਦਲਜੀਤ ਸਿੰਘ, ਕੁਲਦੀਪ, ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ, ਰਮਨ ਸਿੰਘ, ਗੁਰਵਿੰਦਰ, ਵਰਿੰਦਰ ਪਾਲ, ਰੇਨੂੰ, ਰਾਜਵੰਤ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਹੋਰ ਆਗੂ ਤੇ ਮੈਂਬਰ ਹਾਜ਼ਰ ਸਨ।


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*सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा-चपरासी को 36 हजार और शिक्षक को 26 हजार ही क्यों?*
Dainikbhaskar.com 15 Mar.2018 13:30
पटना. 3.55 लाख नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले में राज्य सरकार को फिर सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सुनवाई के दौरान गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा-जब चपरासी को 36 हजार रुपए वेतन दे रहे हैं, तो फिर छात्रों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों को मात्र 26 हजार ही क्यों?

कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 27 मार्च निर्धारित की है। इसके पहले 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर राज्य सरकार को झटका दिया था। कोर्ट ने तब सरकार को यह बताने के लिए कहा था कि नियोजित शिक्षकों को सरकार कितना वेतन दे सकती है? इसके लिए लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी तय कर बताए।

उत्तरप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों से वहां के शिक्षकों को दिया जा रहा वेतन या मानदेय का तुलनात्मक अध्ययन राज्य सरकार ने लगभग 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में रखा। हालांकि अलग-अलग शिक्षकों की कोटि और स्लैब के आधार पर लगभग 20 से 30 प्रतिशत वेतन वृद्धि का लाभ देने की बात रिपोर्ट में है।

7 वां वेतन आयोग की अनुशंसा पर वेतन वृद्धि के अतिरिक्त यह लाभ होगा। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में नियोजित शिक्षकों को पे पैकेज के लिए तीन सदस्यीय कमेटी ने रिपोर्ट फाइनल की है। कमेटी में मुख्य सचिव के अलावा जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी शामिल हैं। इसके पहले कमेटी ने विभिन्न शिक्षक और संबंधित लोगों से प्रस्ताव लिया था।

सुप्रीम कोर्ट में पेश कमेटी की रिपोर्ट में कहा जाएगा कि निर्धारित पे पैकेज का लाभ लेने के लिए नियोजित शिक्षकों को विशेष परीक्षा पास करना जरूरी होगा। परीक्षा पास करने के लिए सरकार शिक्षकों को दो मौका देगी।

सरकार की ओर से आर्थिक भार का मामला फिर उठाया
इसके पहले भी सरकार की वकील ने कोर्ट को बताया था कि प्रति वर्ष शिक्षकों के वेतन पर 28 हजार करोड़ अतिरिक्त भार पड़ेगा। एरियर देने की स्थिति में 52 हजार करोड़ भार पड़ेगा। राज्य सरकार की ओर से फिर एक बार सुप्रीम कोर्ट को बताया जाएगा कि शर्त के आधार पर ही पंचायत और नगर निकाय के माध्यम से इन शिक्षकों का नियोजन किया गया है। राज्य सरकार ने सीधे इन शिक्षकों की बहाली नहीं की है। फिर भी राज्य सरकार ने समय-समय पर इनके वेतन में वृद्धि में होती रही है।

शिक्षकों के पक्ष में फैसले का भरोसा
बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष व विधान पार्षद केदारनाथ पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर खुशी जताते हुए शिक्षकों के पक्ष में फैसला आने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन मिलना ही चाहिए। सरकार को कोर्ट के चक्कर में नहीं पड़ शिक्षकों से ही वार्ता कर सम्मानजनक वेतन निर्धारित कर देना चाहिए था। समान काम के लिए शिक्षकों को समान वेतन अधिकार है। बिहार राज्य प्रारंभिक नियोजित शिक्षक संघ के शिशिर कुमार पांडेय व नवनीत कुमार ने सरकार से फिर एक बार मांग की है कि नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन देकर मामले का समाधान करे।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल : जब एक चपरासी की सैलरी 36000 तो शिक्षकों का वेतन इतना कम क्यों
Thursday, 15 Mar, 11.58 am
#लाइव_सिटीज_डेस्क : नियोजित शिक्षकों से जुड़ी बड़ी खबर सुप्रीम कोर्ट से मिल रही है. मामला नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन को लेकर है. आज 15 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई हुई. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से गंभीर सवाल किया साथ ही सरकार द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर असंतुष्टि भी दिखाई है. कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 27 मार्च तय की है. आज सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा नियोजित शिक्षकों के मामले में सौंपे गए रिपोर्ट पर सुनवाई चल रही थी. सुनवाई के दौरान रिपोर्ट देखकर जस्टिस नाखुश हो गए. उन्होंने कहा कि जब एक चपरासी की सैलरी 36 हजार है तो एक शिक्षक की सैलरी 26 हजार क्यों ?
राज्य सरकार के रिपोर्ट से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई है. अब इस मामले 27 मार्च को फिर से सुनवाई होगी.
मालूम हो कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बिहार सरकार को फटकार भी लगाई गई थी. कोर्ट ने सरकार को जल्द से जल्द 'समान काम सामन वेतन' पर रिपोर्ट तैयार करने को कहा था. इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाया है. साथ ही निर्देश दिया था कि चीफ सेक्रेट्री एक कमिटी बनाये. कोर्ट ने बिहार के चीफ चीफ सेक्रेट्री को जल्द से जल्द शिक्षकों के क्वालिफिकेशन पर रिपोर्ट तैयार कर भेजने को कहा था . इस मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 15 मार्च तय की गई थी. समान काम-समान वेतन : सुप्रीम कोर्ट से बिहार सरकार को फटकार, चीफ सेक्रेट्री से रिपोर्ट तलब
बता दें कि नियोजित शिक्षकों के मामले में 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की बात सामने आई थी. लेकिन 29 जनवरी को इस पर पहली सुनवाई की गई. बता दें कि बिहार सरकार समान काम के बदले समान वेतन देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है.
पिछले साल अक्टूबर में पटना हाईकार्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था. पटना हाईकोर्ट ने इस पर भी आश्चर्य प्रकट किया था कि एक ही स्कूल में दो तरह के वेतन दिये जा रहे हैं. कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन देने का भी निर्देश दिया था. पटना हाईकोर्ट के फैसले से नियोजित शिक्षकों में काफी उत्साह भी जगा था, लेकिन अचानक नियोजित शिक्षकों को तब झटका लगा, जब इस फैसले के खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी. Breaking : दुमका ट्रेजरी मामले में आज टल सकता है लालू प्रसाद पर फैसला
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला पिछले साल 2 नवंबर को लिया. इसे लेकर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने 1 नवंबर बुधवार को विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की और 2 नवंबर गुरुवार को इस निर्णय की पुष्टि कर दी. हालांकि इसे लेकर बिहार सरकार के खिलाफ तमाम नियोजित शिक्षक गुस्से में हैं, वहीं बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ भी सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है.
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देश के करोड़ों कर्मियों को तोहफा, लोकसभा में पारित हुआ ग्रेच्युटी 20 लाख करने का बिल

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने और मातृत्व अवकाश की अवधि मौजूदा 12 सप्ताह से बढ़ाने संबंधी ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2017 आज भारी हंगामे के बीच बिना चर्चा के लोकसभा में पारित हो गया। श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने सदन में बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।

विधेयक में निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि महिलाओं कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश की सीमा बढ़ाये जाने का भी विधेयक में प्रावधान है। मौजूदा सीमा 12 सप्ताह है और बढ़ी हुई सीमा के बारे में सरकार बाद में अधिसूचना जारी करेगी।

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Teachers News / Re: Teachers News Daily Updated
« on: March 13, 2018, 04:07:24 AM »
Teachers protest new transfer policy
Posted at: Mar 12, 2018, 12:49 AM
Last updated: Mar 12, 2018, 12:49 AM (IST)
Teachers submit a memorandum to Congress MLA Kushaldeep Dhillon in Faridkot on Sunday. A Tribune photograph
Teachers submit a memorandum to Congress MLA Kushaldeep Dhillon in Faridkot on Sunday. A Tribune photograph
Tribune News Service

Faridkot, March 11

To register their protest against the transfer policy 2018-19 under which the teachers in government schools in the state will be transferred every seven years, members of the teachers union today met Faridkot MLA Kushaldeep Dhillon and submitted a memorandum.

The teachers demanded that before transferring them, the department should give an opportunity to give their preferences about the places of new postings.

Some days ago, the state government formulated the policy to transfer the teachers in the state after every seven years, which has been approved by the state cabinet.

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